145 करोड़ एफडीआर घोटाला: रिलेशनशिप मैनेजर और बिचौलिया से आमने-सामने पूछताछ

145 करोड़ एफडीआर घोटाला: रिलेशनशिप मैनेजर और बिचौलिया से आमने-सामने पूछताछ

₹145 Crore FDR Scam

₹145 Crore FDR Scam

बिचौलिया 6 दिन के रिमांड पर, कई अकाउंट में ट्रांसफर किए 60 करोड़, सोर्स का पता लगाने में जुटी एसीबी

अर्थ प्रकाश आदित्य शर्मा
पंचकूला। ₹145 Crore FDR Scam: 
नगर निगम की 145 करोड़ रुपये की एफडी में किए गए घोटाले में एसीबी बिचौलिए रजत के जरिए उन खाता मालिकों की तलाश में जुट गई है, जिनके बैंक अकाउंट में आरोपी ने 60 करोड़ से ज्यादा की रकम ट्रांसफर की। एसीबी की जांच में सामने आया है कि साल 2020 से 2025 तक रजत के दो खातों में घोटाले की यह रकम रिसीव हुई थी। कोटक महिंद्रा बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर कुलदीप सिंह राघव और रजत के बीच घोटाले को लेकर हुई सांठगांठ का पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किन बैंक कर्मियों की बदौलत ये राशि किन खातों में ट्रांसफर की गई। 

एसीबी ने इन तमाम पहलुओं की पड़ताल के लिए बीती देर रात को हिरासत में लिए गए आरोपी रजत को जिला अदालत में पेश किया, जहां अभियोजन पक्ष ने आरोपी से खातों का पता लगाने के लिए 10 दिनों के लिए पुलिस रिमांडकी मांग की थी, जिसका बचाव पक्ष के वकीलों विरोध किया। अदालत ने आरोपी को 6 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। 

अभी तक की पूछताछ में आरोपी से सामने आई जानकारियों के आधार पर एसीबी अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई है। बताया जा रहा है कि एसीबी की सेक्टर 11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में शुक्रवार को भी रिकॉर्ड की जांच जारी थी। सूत्रों का कहना है कि रिलेशनशिप मैनेजर कुलदीप से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। वहीं नगर निगम से इस घोटाले के संबंध में रिकॉर्ड की पुष्टि की जा रही है। 

यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। यह कार्रवाई हरियाणा सरकार के उस निर्देश के बाद की गई, जिसमें नगर निगम के फंड में पाई गई गड़बड़ियों की गहन जांच करने को कहा गया था। अधिकारियों के अनुसार, नगर निगम पंचकूला द्वारा रखी गई 16 फिक्स्ड डिपॉज़िट (एफडी) से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इन एफडी की कुल राशि 145 करोड़ रुपये से अधिक थी, और इनकी मैच्योरिटी वैल्यू लगभग 158 करोड़ रुपये थी। इनमें से 11 एफडी, जिनकी कीमत लगभग 59.57 करोड़ रुपये थी, फरवरी 2026 में मैच्योर होने वाली थीं। हालांकि, बैंक ब्रांच द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक स्टेटमेंट न तो आपस में और न ही नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल खा रहे थे। एक खाते में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई, जहां 50 करोड़ रुपये से अधिक का अपेक्षित बैलेंस बैंक रिकॉर्ड में काफी कम पाया गया। इसके अलावा, बैंक ने कथित तौर पर यह भी बताया कि कोई भी सक्रिय टर्म डिपॉज़िट मौजूद नहीं था, जिससे शक और भी गहरा गया।